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बिहार की बेटी श्वेता ने सेल्फ स्टडी के जरिए पाई UPSC में सफलता पिता ने कहा मेरा सपना पूरा हुआ |

ऐसा कहा जाता है कीं अगर इंसान ठान ले तो वो दुनिया में कुछ भी कर गुजर सकता है | असंभव की भी एक न एक दिन शुरुआत करनी ही पड़ती है | और जब उसे सफलता मिलती है तो वही शख्स आने वाले पीढ़ी के लिए मार्ग दर्शन का कारण बनते हैं | दोस्तों, उत्साह और कठोर परिश्रम के द्वारा किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। से ही कहानी बिहार के श्वेता कुमारी की है जिन्होंने सेल्फ स्टडी के बदौलत इस परीक्षा को क्रेक कर लिया है, उनकी इस सफलता की कहानी हर किसी को पढ़नी चाहिए।

5 साल की उम्र में चली गई थी आंखों की रोशनी, बुलंद हौसलों के दम पर फिर UPSC क्लियर कर ऐसे IAS बनीं पूर्णा – प्रेरक कहानी

इस दुनिया में किस्मत को कोसना सबसे आसान काम है | कुछ भी गलत हो, बस लोग बोल देते है मेरी तो किस्मत ही ख़राब है | अच्छा या बुरा किस्मत ये सब उपरवाले के हाथ में है | लेकिन हम चाहे तो अपनी किस्मत खुद लिख सकते है, इसकी स्वतंत्रता हमें दी गई है | इस बात को सही साबित कर दिखाया है एक दृष्टीहीन लड़की पूर्णा सुंदरी | पूर्णा तमिलनाडु के मदुरई की रहने वाली है | पूर्णा आईएएस अधिकारी बनकर सभी लोगो के लिए प्रेरणा श्रोत बन गई है |

बेटी तुम्हें आईएएस बनना है ऐसा कह कर मिन्नू के पिता दुनिया को अलविदा कह दिए, बेटी ने पिता के सपने को पूरा कर दिखाया, किया यूपीएससी क्लियर

” बेटी ! तुम्हें आईएएस बनना है, बेटी तुम खूब मेहनत से पढना, मै तुम्हे बता देना चाहता हूँ जो लोग लगन और मेहनत से पढ़ते है उन्हें सफलता जरुर मिलती है | मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ रहेगा ” और मिन्नू के पिता इस दुनिया को अलविदा कह दिए | मिन्नू महज इंटरमीडिएट में पढ़ती थी की उसके सर से बाप का साया उठ गया | मिन्नू के दिमाग पर बहुत गहरा असर पड़ा था |

IAS D. Ranjit जो बोल-सुन नहीं पाते, हिम्मत नहीं हारे, मेहनत से पढ़ाई की और बने अपने राज्य में UPSC टॉपर

संघर्ष इतने ख़ामोशी से करना चहिये की सफलता शोर मचा दे | दिव्यान्गता कोई अभिशाप नहीं | शारीरिक अक्षमता ऊपर वाले की देन है | इससे कभी मन दुखी नहीं करनी चाहिए | जो लोग एकाग्र होकर संघर्ष करते है वे जिंदगी का हर मुकाम पा सकते है | चाहे वो दिव्यांग ही क्यों न हो | ऐसा ही संघर्ष की कहानी है तमिलनाडु के डी रंजित की |

स्कूल के साथ करते थे जूते-चप्पलों की दुकान में काम, आर्थिक तंगी को मात देकर किया UPSC को क्लियर

कुछ लोगों का मानने है की गरीबी एक अभिशाप है | परन्तु हम ऐसा नहीं मानते | गरीबी या अमीरी से किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व से कोई लेना-देना नहीं है | इंसान के अन्दर कोई चीज़ महत्वपूर्ण है तो वह है उसका व्यक्तित्व | कुछ लोग ऐसे होते है जो गरीबी के कारण सिर्फ किस्मत को कोसते रहते है | ऐसे लोग गरीब इस दुनिया में आते है और गरीब ही चले जाते है | लेकिन कुछ लोग गरीब को पैदा होते है मगर जिंदगी में कुछ ऐसा कर गुजरते है की मिसाल कायम कर जाते है |

Swati Meena मात्र 22 वर्ष की उम्र में IAS बनी, दबंग छवि से बड़े-बड़े बाहुबली भी पकड़ लेते है पतली गली

आईएएस आईपीएस के पद पर बैठने का सपना देखने वालों के लिए यूपीएससी ( UPSC – Union Public Service Commission) कोई साधारण परीक्षा नहीं बल्कि एक तपस्या के समान है। तभी तो अभ्यर्थी अपना घर-परिवार, खाना-पीना, सब कुछ भूल कर खुद को इस परीक्षा में की तैयारी में पूरी तरह झोंक देते हैं। यहां वही सफल हो पाते हैं, जिनके पास बड़े सपने हो और उसे साकार करने की काबिलियत भी। तो आइए जानते हैं एक ऐसे ही आईएएस ऑफिसर के बारे में जिन्होंने सपना तो देखा डॉक्टर बनने का, लेकिन वक्त ने उन्हें IAS – Indian Administrative Service के दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया।

62 साल की वृद्ध महिला जो साइकिल से घर-घर जाकर बेचती हैं दूध, उठाती हैं 6 बेटियों की जिम्मेदारी

ऐसा कहा जाता है कीं अगर इंसान ठान ले तो वो दुनिया में कुछ भी कर गुजर सकता है | असंभव की भी एक न एक दिन शुरुआत करनी ही पड़ती है | और जब उसे स फलता मिलती है तो वही शख्स आने वाले पीढ़ी के लिए मार्ग दर्शन का कारण बनते हैं | नियति इंसान से वह काम भी करवाती है, जो उसने कभी सोचा नहीं था। कुछ ऐसा ही हुआ शीला बुआ (Shila Bua) के साथ। 40 वर्षों पूर्व नियति के खेल में उनका सुहाग उजड़ गया और फिर वे कासगंज (Kasganj ) में उनके मायके में आ गईं।

42 वर्षीय सुनीता आर 18 वॉलंटियर्स ड्राइवर के बीच चुनी गई एकमात्र महिला ड्राइवर

कर्नाटक में ऑटोरिक्शा एंबुलेंस के लिए 18 वॉलंटियर्स ड्राइवर का चयन किया गया। इसमें से सुनीता आर एकमात्र महिला हैं जिनका चयन ऑटोरिक्शा एंबुलेंस के लिए हुआ है। सुनीता के अनुसार, ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने महामारी के बीच अपनी जान दांव पर लगाकर दूसरों की मदद की है। मैंने कोरोना पेशेंट की मदद के लिए ऑटोरिक्शा एंबुलेंस ड्राइवर बनना तय किया। इस एंबुलेंस में मेडिकल केयर से जुड़े सभी इक्विपमेंट और ऑक्सीजन की सुविधा है।

ऐश्वर्या श्योरेन ने किया टॉप मिस इंडिया फाइनलिस्ट बनने के बाद चुना UPSC का रास्ता और बन गईं IFS

यूपीएससी की परीक्षा को अपने आप में सबसे कठिन और कड़ा एग्जाम माना जाता है | ऐश्वर्या श्योरेन ने तय किया रैंप से टॉप रैंक का सफर, मिस इंडिया फाइनलिस्ट बनने के बाद चुना UPSC का रास्ता और बन गईं IFS UPSC Exam को लेकर देश के युवाओं में एक अलग क्रेज देखने को मिलता है। हर साल लाखों कैंडिडेट UPSC एग्जाम में बैठते हैं, लेकिन चुनिंदा कैंडिडेट को ही इसमें कामयाबी हासिल होती है।

मां ने बेटे को भेजा अनाथालय, कड़ी मेहनत से पढ़ाई कर बदली किस्मत और बना IAS अधिकारी

आईएएस के पद पर बैठने का सपना देखने वालों के लिए यूपीएससी कोई परीक्षा नहीं बल्कि तपस्या के समान है | असफलता पाकर वो किस्मत को कोसते रहते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अपनी परिस्थितयों को कोसने की बजाय उनसे सामना करते हैं और सफलता की एक नई कहानी लिख जाते हैं |