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ऐसा परिवार, जहां 39 लोगों का खाना एक साथ एक घर और एक चूल्हा फिर भी चार पीढ़ियां साथ रह रही

जहां एक तरफ आज के समय में संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं, लोगों को छोटे परिवार (small family) अच्छे लग रहे हैं। वहीं, एक ऐसा भी परिवार है जहां 39 लोग एक साथ रहते हैं। यूं तो कहा जाता है कि छोटा परिवार सुखी परिवार लेकिन ये परिवार बहुत बड़ा है और यह परिवार बड़ा होने के बावजूद बहुत ही खुश है।

बिहार की बेटी श्वेता ने सेल्फ स्टडी के जरिए पाई UPSC में सफलता पिता ने कहा मेरा सपना पूरा हुआ |

ऐसा कहा जाता है कीं अगर इंसान ठान ले तो वो दुनिया में कुछ भी कर गुजर सकता है | असंभव की भी एक न एक दिन शुरुआत करनी ही पड़ती है | और जब उसे सफलता मिलती है तो वही शख्स आने वाले पीढ़ी के लिए मार्ग दर्शन का कारण बनते हैं | दोस्तों, उत्साह और कठोर परिश्रम के द्वारा किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। से ही कहानी बिहार के श्वेता कुमारी की है जिन्होंने सेल्फ स्टडी के बदौलत इस परीक्षा को क्रेक कर लिया है, उनकी इस सफलता की कहानी हर किसी को पढ़नी चाहिए।

5 साल की उम्र में चली गई थी आंखों की रोशनी, बुलंद हौसलों के दम पर फिर UPSC क्लियर कर ऐसे IAS बनीं पूर्णा – प्रेरक कहानी

इस दुनिया में किस्मत को कोसना सबसे आसान काम है | कुछ भी गलत हो, बस लोग बोल देते है मेरी तो किस्मत ही ख़राब है | अच्छा या बुरा किस्मत ये सब उपरवाले के हाथ में है | लेकिन हम चाहे तो अपनी किस्मत खुद लिख सकते है, इसकी स्वतंत्रता हमें दी गई है | इस बात को सही साबित कर दिखाया है एक दृष्टीहीन लड़की पूर्णा सुंदरी | पूर्णा तमिलनाडु के मदुरई की रहने वाली है | पूर्णा आईएएस अधिकारी बनकर सभी लोगो के लिए प्रेरणा श्रोत बन गई है |

IAS इंटरव्यू सवाल : लड़की लड़को से क्या करवाती जिसमे उनको मजा आता है ?

हमारे देश भारत में यूपीएससी की परीक्षा सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षा परीक्षा मानी जाती है l क्योंकि इस परीक्षा में लिखित परीक्षा तो होती ही है साथ ही साथ परीक्षार्थियों का इंटरव्यू भी लिया जाता है l परीक्षार्थियों को IAS बनने के लिए इस परीक्षा मै जनरल नॉलेज की जानकारी होना बहुत आवश्यक है | इंसान अपने जज्बे और जुनून से कठिन से कठिन लक्ष्य को पा सकता है |

पिता गांव-गांव घूमकर बेचते थे कपड़े, बेटा UPSC क्रैक करके बन गया IAS अधिकारी, माँ की आँखे हुई नम

किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए जोश और जुनून का होना अनिवार्य है | विश्वाश के साथ किया गया परिश्रम से सफलता जरुर मिलती है | प्रतिदिन अपने दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव लाकर हम एक दिन बहुत बड़ी कामयाबी का हिस्सा हो जाते है | इस बात को सही साबित कर दिया है बिहार राज्य किशनगंज जिले के अनिल बसाक ने |

बकरियां चराने वाले ने पहली बार में पास किया UPSC परीक्षा, अपनी नौकरी छोड़ बने DSP

यह कहानी है किशोर कुमार रजक की जिन्होंने कभी हार नहीं मानी जिन्होंने अपने मेहनत के आगे साड़ी चुनौतियों का दत्त क्र सामना किया अपने लगन और परिश्रम से एक छोटे से गाओ से एक बड़े अफसर बन कर निकले आज इनके नाम से इनके गाओ का बच्चा बच्चा भी प्रेरित हो जाता ह।

IAS Dr.Apala Mishra एक डेंटिस्ट से बनी प्रसाशनिक सेवा की अधिकारी, UPSC में लाई 9वीं रैंक, बढाया पिता का मान

यूपीएससी UPSC (Union Public Service Commission) परीक्षा अब तक की सबसे कठिन परीक्षा है। इस परीक्षा को पास करने के लिए अभ्यर्थी को तीन-तीन पड़ाव से गुजरना पड़ता है। पहला पड़ाव प्री एग्जामिनेशन का होता है। दूसरे में मेंस परीक्षा देते हैं। फिर अभ्यार्थी का इंटरव्यू (साक्षात्कार) होता है। इस तीनों पड़ाव को पार करने के बाद ही कोई आईएएस बन पाता है।

बेटी तुम्हें आईएएस बनना है ऐसा कह कर मिन्नू के पिता दुनिया को अलविदा कह दिए, बेटी ने पिता के सपने को पूरा कर दिखाया, किया यूपीएससी क्लियर

” बेटी ! तुम्हें आईएएस बनना है, बेटी तुम खूब मेहनत से पढना, मै तुम्हे बता देना चाहता हूँ जो लोग लगन और मेहनत से पढ़ते है उन्हें सफलता जरुर मिलती है | मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ रहेगा ” और मिन्नू के पिता इस दुनिया को अलविदा कह दिए | मिन्नू महज इंटरमीडिएट में पढ़ती थी की उसके सर से बाप का साया उठ गया | मिन्नू के दिमाग पर बहुत गहरा असर पड़ा था |

IAS D. Ranjit जो बोल-सुन नहीं पाते, हिम्मत नहीं हारे, मेहनत से पढ़ाई की और बने अपने राज्य में UPSC टॉपर

संघर्ष इतने ख़ामोशी से करना चहिये की सफलता शोर मचा दे | दिव्यान्गता कोई अभिशाप नहीं | शारीरिक अक्षमता ऊपर वाले की देन है | इससे कभी मन दुखी नहीं करनी चाहिए | जो लोग एकाग्र होकर संघर्ष करते है वे जिंदगी का हर मुकाम पा सकते है | चाहे वो दिव्यांग ही क्यों न हो | ऐसा ही संघर्ष की कहानी है तमिलनाडु के डी रंजित की |

बकरी वाली दीदियों ने खड़ी कर दी ढाई करोड़ की कंपनी, 50 से 60 हजार रुपये सालाना कमाई

गरीबों की गाय कहीं जाने वाली बकरी सिर्फ दूध नहीं देती बल्कि सामाजिक समृद्धि के द्वार भी खोल रही है। पटना जिले मसौढ़ी की रहने वाली 100 से अधिक मुसहर समुदाय की महिलाएं बकरी पालन से अपनी जिन्दगी बदली है। बता दे की इसके अलावे बिहार के दरभंगा के किरतपुर की रहने वाली साढ़े तीन हजार भूमिहीन महिलाओं ने ढाई करोड़ की की कंपनी खड़ी कर इसे साबित कर दिया है।