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ऐसा परिवार, जहां 39 लोगों का खाना एक साथ एक घर और एक चूल्हा फिर भी चार पीढ़ियां साथ रह रही

जहां एक तरफ आज के समय में संयुक्त परिवार खत्म होते जा रहे हैं, लोगों को छोटे परिवार (small family) अच्छे लग रहे हैं। वहीं, एक ऐसा भी परिवार है जहां 39 लोग एक साथ रहते हैं। यूं तो कहा जाता है कि छोटा परिवार सुखी परिवार लेकिन ये परिवार बहुत बड़ा है और यह परिवार बड़ा होने के बावजूद बहुत ही खुश है।

बिहार की बेटी श्वेता ने सेल्फ स्टडी के जरिए पाई UPSC में सफलता पिता ने कहा मेरा सपना पूरा हुआ |

ऐसा कहा जाता है कीं अगर इंसान ठान ले तो वो दुनिया में कुछ भी कर गुजर सकता है | असंभव की भी एक न एक दिन शुरुआत करनी ही पड़ती है | और जब उसे सफलता मिलती है तो वही शख्स आने वाले पीढ़ी के लिए मार्ग दर्शन का कारण बनते हैं | दोस्तों, उत्साह और कठोर परिश्रम के द्वारा किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। से ही कहानी बिहार के श्वेता कुमारी की है जिन्होंने सेल्फ स्टडी के बदौलत इस परीक्षा को क्रेक कर लिया है, उनकी इस सफलता की कहानी हर किसी को पढ़नी चाहिए।

बिहार के लाल ने किया कमाल इसरो में लहराया बिहार का परचम बनेंगे साइंटिस्ट हो रही काफी तारीफ़

बिहार के पूर्णिया के बेटे आशुतोष कुमार ने पूरे भारत देश में बिहार और पूर्णिया का नाम रोशन किया है। आशुतोष का ISRO में वैज्ञानिक के तौर पर चयनित किया गया है। बिहार के लाल आशुतोष ने ISRO में मैकेनिकल साइंटिस्ट पद के लिए 2019 में विज्ञापन निकाला गया था। देश के करीब 70 हजार प्रतिभागियों ने 2020 में एग्जाम दिया था।

5 साल की उम्र में चली गई थी आंखों की रोशनी, बुलंद हौसलों के दम पर फिर UPSC क्लियर कर ऐसे IAS बनीं पूर्णा – प्रेरक कहानी

इस दुनिया में किस्मत को कोसना सबसे आसान काम है | कुछ भी गलत हो, बस लोग बोल देते है मेरी तो किस्मत ही ख़राब है | अच्छा या बुरा किस्मत ये सब उपरवाले के हाथ में है | लेकिन हम चाहे तो अपनी किस्मत खुद लिख सकते है, इसकी स्वतंत्रता हमें दी गई है | इस बात को सही साबित कर दिखाया है एक दृष्टीहीन लड़की पूर्णा सुंदरी | पूर्णा तमिलनाडु के मदुरई की रहने वाली है | पूर्णा आईएएस अधिकारी बनकर सभी लोगो के लिए प्रेरणा श्रोत बन गई है |

बकरियां चराने वाले ने पहली बार में पास किया UPSC परीक्षा, अपनी नौकरी छोड़ बने DSP

यह कहानी है किशोर कुमार रजक की जिन्होंने कभी हार नहीं मानी जिन्होंने अपने मेहनत के आगे साड़ी चुनौतियों का दत्त क्र सामना किया अपने लगन और परिश्रम से एक छोटे से गाओ से एक बड़े अफसर बन कर निकले आज इनके नाम से इनके गाओ का बच्चा बच्चा भी प्रेरित हो जाता ह।

IAS Dr.Apala Mishra एक डेंटिस्ट से बनी प्रसाशनिक सेवा की अधिकारी, UPSC में लाई 9वीं रैंक, बढाया पिता का मान

यूपीएससी UPSC (Union Public Service Commission) परीक्षा अब तक की सबसे कठिन परीक्षा है। इस परीक्षा को पास करने के लिए अभ्यर्थी को तीन-तीन पड़ाव से गुजरना पड़ता है। पहला पड़ाव प्री एग्जामिनेशन का होता है। दूसरे में मेंस परीक्षा देते हैं। फिर अभ्यार्थी का इंटरव्यू (साक्षात्कार) होता है। इस तीनों पड़ाव को पार करने के बाद ही कोई आईएएस बन पाता है।

IAS D. Ranjit जो बोल-सुन नहीं पाते, हिम्मत नहीं हारे, मेहनत से पढ़ाई की और बने अपने राज्य में UPSC टॉपर

संघर्ष इतने ख़ामोशी से करना चहिये की सफलता शोर मचा दे | दिव्यान्गता कोई अभिशाप नहीं | शारीरिक अक्षमता ऊपर वाले की देन है | इससे कभी मन दुखी नहीं करनी चाहिए | जो लोग एकाग्र होकर संघर्ष करते है वे जिंदगी का हर मुकाम पा सकते है | चाहे वो दिव्यांग ही क्यों न हो | ऐसा ही संघर्ष की कहानी है तमिलनाडु के डी रंजित की |

छोटे से गाँव से निकल कर गरिमा अग्रवाल पहुची विदेश, लाखों की जॉब छोड़ देश सेवा की भावना लिए लौटी स्वदेश भारत बनी IPS फिर IAS

इन्हीं लाइनों से प्रभावित हुई एक ऐसी लड़की जिसने इतिहास ही रच दिया जो मन में था उसे करने के लिए उसे पाने के लिए अपनी एसो-आराम वाली जिंदगी दांव पर लगाकर अपनी मनचाही मंजिल को पाया और इतिहास रच मिशाल पेश की. आज हम आपको बताने वाले है आईएएस (IAS – Indian Administrative Service) गरिमा अग्रवाल के बारे में। जिसने UPSC (Union Public Service Commission) क्लियर कर पहले बनी आईपीएस ( Indian Police Service ) फिर आईएएस.

स्कूल के साथ करते थे जूते-चप्पलों की दुकान में काम, आर्थिक तंगी को मात देकर किया UPSC को क्लियर

कुछ लोगों का मानने है की गरीबी एक अभिशाप है | परन्तु हम ऐसा नहीं मानते | गरीबी या अमीरी से किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व से कोई लेना-देना नहीं है | इंसान के अन्दर कोई चीज़ महत्वपूर्ण है तो वह है उसका व्यक्तित्व | कुछ लोग ऐसे होते है जो गरीबी के कारण सिर्फ किस्मत को कोसते रहते है | ऐसे लोग गरीब इस दुनिया में आते है और गरीब ही चले जाते है | लेकिन कुछ लोग गरीब को पैदा होते है मगर जिंदगी में कुछ ऐसा कर गुजरते है की मिसाल कायम कर जाते है |

बिहार की बेटी का डबल धमाका UPSC के बाद bpsc में भी दिखाई आर्मी जवान की बेटी ने अपना जलवा

बिहार के गोपालगंज जिले की बेटी भर की गौरव अनामिका सिंह ने यूपीएससी (UPSC) में सफलता पाने के बाद बीपीएससी (BPSC) की 65वीं परीक्षा में भी सफलता हासिल की है. उनका घर बिहार के गोपालगंज जिले के कुचायकोट प्रखंड के बखरी गांव के निवासी उदय नारायण सिंह की बेटी अनामिका सिंह की पढ़ाई-लिखाई आर्मी स्कूल, बरेली, उत्तर प्रदेश से हुई है |