Upsc

5 साल की उम्र में चली गई थी आंखों की रोशनी, बुलंद हौसलों के दम पर फिर UPSC क्लियर कर ऐसे IAS बनीं पूर्णा – प्रेरक कहानी

इस दुनिया में किस्मत को कोसना सबसे आसान काम है | कुछ भी गलत हो, बस लोग बोल देते है मेरी तो किस्मत ही ख़राब है | अच्छा या बुरा किस्मत ये सब उपरवाले के हाथ में है | लेकिन हम चाहे तो अपनी किस्मत खुद लिख सकते है, इसकी स्वतंत्रता हमें दी गई है | इस बात को सही साबित कर दिखाया है एक दृष्टीहीन लड़की पूर्णा सुंदरी | पूर्णा तमिलनाडु के मदुरई की रहने वाली है | पूर्णा आईएएस अधिकारी बनकर सभी लोगो के लिए प्रेरणा श्रोत बन गई है |

पिता गांव-गांव घूमकर बेचते थे कपड़े, बेटा UPSC क्रैक करके बन गया IAS अधिकारी, माँ की आँखे हुई नम

किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए जोश और जुनून का होना अनिवार्य है | विश्वाश के साथ किया गया परिश्रम से सफलता जरुर मिलती है | प्रतिदिन अपने दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव लाकर हम एक दिन बहुत बड़ी कामयाबी का हिस्सा हो जाते है | इस बात को सही साबित कर दिया है बिहार राज्य किशनगंज जिले के अनिल बसाक ने |

बकरियां चराने वाले ने पहली बार में पास किया UPSC परीक्षा, अपनी नौकरी छोड़ बने DSP

यह कहानी है किशोर कुमार रजक की जिन्होंने कभी हार नहीं मानी जिन्होंने अपने मेहनत के आगे साड़ी चुनौतियों का दत्त क्र सामना किया अपने लगन और परिश्रम से एक छोटे से गाओ से एक बड़े अफसर बन कर निकले आज इनके नाम से इनके गाओ का बच्चा बच्चा भी प्रेरित हो जाता ह।

IAS D. Ranjit जो बोल-सुन नहीं पाते, हिम्मत नहीं हारे, मेहनत से पढ़ाई की और बने अपने राज्य में UPSC टॉपर

संघर्ष इतने ख़ामोशी से करना चहिये की सफलता शोर मचा दे | दिव्यान्गता कोई अभिशाप नहीं | शारीरिक अक्षमता ऊपर वाले की देन है | इससे कभी मन दुखी नहीं करनी चाहिए | जो लोग एकाग्र होकर संघर्ष करते है वे जिंदगी का हर मुकाम पा सकते है | चाहे वो दिव्यांग ही क्यों न हो | ऐसा ही संघर्ष की कहानी है तमिलनाडु के डी रंजित की |

एक गरीब इलेक्ट्रीशियन की बेटी ने पास कर लिया देश की सबसे कठिन UPSC की परीक्षा, पूरा गाँव आया बधाई देने

एक इलेक्ट्रीशियन जो घर-घर जाकर बिजली बत्ती का काम करता था | दुसरे के अँधेरे घरों में रौशनी लाता था | भले यह काम वह रुपया पैसा कमाने के लिए करता था लेकिन उनके अन्दर भी रौशनी की लौ हमेशा जलती रहती थी | एक अच्छे भविष्य की लौ | वर्तमान के इस जद्दो-जहद से छुटकारा पाने की लौ | अक्सर शाम को जब वह इलेक्ट्रीशियन का काम करके वह घर आता तो अपने बच्चो से खूब सारा ज्ञान की बातें करता | उन्हें अच्छी-अच्छी बाते सिखाता | वह बताता मेहनत करने वालों को हमेशा सफलता मिलती है | अपने बच्चो को अक्सर सिख देता की पढाई-लिखाई से हम अपनी किस्मत बदल सकते है | जो लोग अच्छे से मन लगा कर पढ़ते है सफलता उनकी कदम चूमती है |

कमाल हो गया ! दिहाड़ी मजदूर की बेटी बन गई IAS , UPSC क्लियर कर हासिल की 481 वीं रैंक, रिजल्ट देख कर पिता लगे रोने

ईट माथे पर उठा कर राज मिस्त्री के तरफ जाता एक लेबर अक्सर यह सोचता , क्या यही मेरी नियति है, क्या मै हमेशा इसी तरह मजदूरी करता हुआ रह जाऊंगा , क्या मै ऐसे ही एक दिन गुमनामों की तरह खत्म हो जाऊंगा | नहीं-नहीं ! मुझे कुछ करना होगा, मै अपनी बेटी को खूब पढ़ूंगा | मेरी बेटी के पढाई में जो खर्चा होगा मै उसे खून पसीने एक कर के उपलब्ध कराऊंगा | प्रत्येक दिन यही सपना देखता वो शख्स एक कंस्ट्रक्शन साईट पर लेबर का काम करता | किसी ने सोचा भी न था की इस मामूली से मजदुर का सपना एक दिन साकार हो जायेगा | उसकी बेटी पढ़-लिख कर आईएएस अफ़सर बन जाएगी |

गरीब मजदूर की बेटी दोस्तों के चंदे पर यूपीएससी का इंटरव्यू देने गई थी, पढ़िए इनकी कहानी…

मेरे राज्य में आदिवासी समाज से किसी ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास नहीं की थी। मैं यह परीक्षा पास करने वाली पहली लड़की हूं, जबकि यहां पर बहुत बड़ी जनजातीय आबादी है। यहां बहुत कम लोग हैं, जो यूपीएससी के बारे में जानकारी रखते हैं। पर मुझे भरोसा है कि मेरी उपलब्धि से प्रेरित होकर अब यहां के युवा सिविल सर्विसेज की तैयारी करेंगे और सफल भी होंगे।

कभी खेतों में किया काम, UPSC परीक्षा से 15 दिन पहले हुआ डेंगू, ICU में किया तैयारी, हिम्मत नहीं हारी, बने IAS ऑफिसर

क्या सच में किस्मत होता है? कोई कहता है मेरी खराब किस्मत है , कोई कहता है मेरी अच्छी किस्मत है। क्या यह सब ऐसे ही बोला जा रहा है, या इसमें कुछ सच्चाई भी है। सीधे-सीधे बोले तो मुझे नहीं पता। मुझे तो बस इतना पता है की परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता। चाहे कोई भी हो अच्छी किस्मत वाले या खराब किस्मत वाले सफलता तो परिश्रम करने वाले की ही कदम चूमती है।

कभी भैस चरती थी , पिता थे ऑटो ड्राईवर , सी.वनमती UPSC क्लियर कर बनी IAS अधिकारी , पुरे गाँव को है गर्व

यूपीएससी ( UPSC – Union Public Service Commission ) में प्रत्येक वर्ष लगभग 1000 से भी कम सीटें होती हैं। यूपीएससी ( UPSC – Union Public Service Commission ) में प्रत्येक वर्ष लाखों अभ्यार्थी आईएएस ( IAS – Indian Administrative Service ) ऑफिसर बनने के लिए यूपीएससी का एग्जाम देते हैं। ऐसे में सबसे तेज और बेस्ट अभ्यार्थी का ही सिलेक्शन हो पाता है। इस परीक्षा में पास करने के लिए विद्यार्थी को कई सालों तक लगन मेहनत और धैर्य रखकर पढ़ाई करनी पड़ती है। साथ-साथ घर के हालात आर्थिक हालात और सामाजिक हालात से भी निपटना पड़ता है।

पिता ने ब्याज पर कर्ज लेकर बेटे को बनाया IAS अफसर, वीर ने तीसरी बार में पास की UPSC

यूपीएससी की परीक्षा को अपने आप में सबसे कठिन और कड़ा एग्जाम माना जाता है | अभ्यर्थी अपना घर परिवार खाना पीना सब भूल कर खुद को इस परीक्षा की तैयारी में पूरी तरह से झोंक देते हैं | ऐसी एक कहानी है वीर प्रताप सिंह राघव की, जिन्होंने यूपीएससी पास कर आईएएस अफसर बनने के लिए जितनी कठिन तपस्या की, कहीं उससे अधिक उनके परिवार ने दुख और कष्ट सहे। लेकिन इसके बाद जब मेहनत का फल मिला तो वह अपने स्वाद से भी अधिक मीठा निकला।