कमाल हो गया ! दिहाड़ी मजदूर की बेटी बन गई IAS , UPSC क्लियर कर हासिल की 481 वीं रैंक, रिजल्ट देख कर पिता लगे रोने

ईट माथे पर उठा कर राज मिस्त्री के तरफ जाता एक लेबर अक्सर यह सोचता , क्या यही मेरी नियति है, क्या मै हमेशा इसी तरह मजदूरी करता हुआ रह जाऊंगा , क्या मै ऐसे ही एक दिन गुमनामों की तरह खत्म हो जाऊंगा | नहीं-नहीं ! मुझे कुछ करना होगा, मै अपनी बेटी को खूब पढ़ूंगा | मेरी बेटी के पढाई में जो खर्चा होगा मै उसे खून पसीने एक कर के उपलब्ध कराऊंगा | प्रत्येक दिन यही सपना देखता वो शख्स एक कंस्ट्रक्शन साईट पर लेबर का काम करता | किसी ने सोचा भी न था की इस मामूली से मजदुर का सपना एक दिन साकार हो जायेगा | उसकी बेटी पढ़-लिख कर आईएएस अफ़सर बन जाएगी |

UPSC aspirant IAS S.Awasthi success story in Hindi : आज की कहानी आईएएस एस. अस्वती की है | अत्यंत गरीब परिवार में जन्मी IAS S. Awasthi के पिता तिरुवनंतपुरम में एक कंस्ट्रक्शन लेबर थे | घर की माली हालात काफी जर्जर थी | काफी मुश्किल से घर का भरण-पोषण होता था | लेकिन पिता और आज्ञाकारी पुत्री ने एक साथ एक सपना देखा था की इस गरीबी से उन्हें बहार निकलना है | तमाम तरह की आर्थिक और पारिवारिक चुनौतियों को किनारे करते हुए अस्वती ने यूपीएससी क्वालिफाई किया और IAS बनी |

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एस.अवस्ती बताती है संघ लोक सेवा आयोग UPSC (Union Public Service Commission) का रिजल्ट देखते ही मुझे यकीन नहीं हुआ की मै पास कर गई हूँ | पापा का सपना पूरा कर चुकी हूँ | जब घर में मैंने बताया की मै बहुत बड़ी IAS (IAS – Indian Administrative Service) अफ़सर बन गई हूँ तो किसी को येकिन नहीं हो रहा था | खुशी से पिता की आँखे नम हो चुकी थी | पुरे गाँव में सारे लोग सोच में पड़ गए थे की ये कैसे हो गया | पडोसी और सगे-सम्बन्धी लोग लगातार बधाई देने आ रहे थे | आगे उन्होंने कहा मुझे इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) मिल सकता है |

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एक साक्षात्कार में एस अवस्ती ने बताया की जब वो क्लास-8 में थीं तभी आईएएस बनने का सपना देख ली थीं | उन दिनों ही सोच ली थी की पढ़-लिख कर एक दिन बड़ी अफ़सर बनूँगी | अपनी प्रारंभिक शिक्षा खत्म करने के बाद 12वीं भी अच्छे अंको से पास कर ली | बाद वह इंजीनियरिंग कीं और गवर्नमेंट बार्टन हिल इंजीनियरिंग कॉलेज से engineering भी पास कर ली | फिर प्राइवेट जॉब करने लगी | उनका सिलेक्शन TCS कोच्चि में साल 2015 में हो गया |

लेकिन, आठवीं कक्षा से ही उनके मन में तो कुछ और ही चल रहा था | एक सफल आईएएस बनने का सपना | TCS के जॉब में उन्हें मन नहीं लगता था | फिर उन्होंने जॉब छोड़ दिया | साल 2017 में उन्होंने पूरी तरह से UPSC (Union Public Service Commission) सिविल सर्विस की तैयारी में लग गईं | वह केरल स्टेट सिविल सर्विसेज एकेडमी में पढ़ने लगीं और इसके बाद तिरुवनंतपुरम में कुछ प्राइवेट एकेडमी में भी तैयारी करने लगीं |

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