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बाल विवाह देश की सबसे चुनौतियों में से एक है. 21वीं सदी में जीते हुए भी कई नाबालिग लड़कियों को बाल विवाह के अंधेरे कुएं में ढकेल दिया जाता है. सख़्त क़ानून होने के बावजूद हर साल कई लड़कियों की ज़िन्दगी ख़ुद उनके ही माता-पिता  बर्बाद कर देते हैं. असम की एक 15 साल की लड़की के साथ भी कुछ ऐसा ही होता अगर बॉर्डर सिक्योरिटी फ़ोर्स (Border Security Force, BSF) के जवान उसे बचाने के लिए सही मौक़े पर नहीं पहुंचते. Hindustan Times की एक रिपोर्ट के अनुसार, BSF की ऐंटी ह्यूमन ट्रैफ़िकिंग यूनिट (Anti Human Trafficking Unit, AHTU) ने असम के करीमगंज ज़िले से एक लड़की को बचाया.

ये घटना भारत-बांग्लादेश बॉर्डर स्थित निलमबाज़ार के पास बीते 14 जुलाई की है. मिली जानकारी के आधार पर एंटी ह्यूमन ट्रैफ़िकिंग यूनिट गांव के पास पहुंची और लड़की, लड़के और दोनों के माता-पिता के साथ पंडित को भी पकड़ लिया. बीएसएफ ने लड़के, माता-पिता और अन्य को पुलिस को सौंप दिया. वहीं लड़की को बीएसएफ ने करीमगंज के चाइल्ड प्रोटेक्शन होम भेज दिया.

134 Bn बीएसएफ और बीओपी बिलबारी इंटैलिजेंस स्टाफ़ (BOP Bilbari Intelligence Staff) ने काबोई (Kaboi) गांव में जॉइंट ऑपरेशन चलाया और स्थानीय पुलिस को भी जानकारी दी. बीएसएफ अधिकारियों ने मीडिया से बात-चीत करते हुए बताया कि उन्हें सभी दोषियों को रंगे हाथ पकड़ना था, तभी लड़की की ज़िन्दगी बचाना संभव था. 

इस मामले में लड़के, उसके माता-पिता, लड़की के माता-पिता पर Prohibition of Child Marriage Act (PCMA) 2006 सहित अन्य दफ़ाओं के तहत केस दर्ज किया गया है. शुरुआती छानबीन में पता चला है कि लड़की की मां विधवा है और उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. लड़की की मां को मानवीय आधारों पर छोड़ दिया गया. मामले की जांच जारी है. 

सोनू मूल रूप से बिहार के समस्तीपुर जिला के रहने वाले है पिछले 4 साल से डिजिटल पत्रकारिता...