बिहार में होगी जातीय जनगणना, 500 करोड़ रुपये खर्च कर सभी धर्मों की जातियों एवं उपजातियों की होगी गिनती

बिहार सरकार ने राज्य के संसाधनों से जाति आधारित गणना कराने का प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को हरि झंडी मिल गई है। इसके साथ ही बिहार नगरपालिका निर्वाचन नियमावली 27(2) के संशोधन के लिए बिहार नगरपालिका निर्वाचन संशोधन नियमावली 2022 के प्रारूप को भी मंजूरी दी गई।

मंत्रिमंडल ने बिहार गवाह सुरक्षा कोष नियमावली 2922 के प्रारूप को भी मंजूरी दी गई। बिहार अपने संसाधनों से ही जाति आधारित गणना कराएगा। इसमें करीब 500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इस दौरान राज्य में सभी धर्मों की जातियों एवं उपजातियों की भी गिनती होगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 14 एजेंडों पर मुहर लगाई गई।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने बताया जाति आधारित गणना सामान्य प्रशासन विभाग कराएगा। जिलों में नोडल अफसर पद का जिम्मा जिलाधिकारी को दिया गया है। गणना में पंचायत राज्य विभाग के कर्मियों का सहयोग भी लिया जा सकेगा। जाति गणना के दौरान आर्थिक गणना की भी कोशिश होगी। आमिर सुबहानी ने बताया फरवरी 2023 तक गणना का काम पूरा करने का लक्ष्य है। मंत्रिमंडल ने राज्य के चिह्नित पर्यटन परिपथ पर पर्यटक सुविधा के उन्नयन के लिए मानकीकरण प्रोत्साहन योजना 2022 की स्वीकृति भी दी गई।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में बुधवार को संवाद कक्ष में आयोजित सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से राज्य में जाति आधारित गणना कराने का फैसला लिया गया था। विधानसभा में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी नौ दलों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से जाति आधारित गणना कराने की सहमति दी थी। बिहार में सभी धर्मों की जातियों एवं उपजातियों की गणना कराए जाने की बात सीएम ने कही थी। ऐसा करने वाला बिहार दूसरा राज्य बन जाएगा इससे पहले यह काम कर्नाटक में किया गया है |