बिहार : मुंगेर ब्रिज चालू होने से बदलने लगी क्षेत्र की रौनक, बढ़ने लगा रोजगार की आस मोगों में ख़ुशी की लहर….

बिहार के लोगों को बहुत सालों बाद सपना साकार हुआ है मुंगेर ब्रिज के रूप में जी हाँ दोस्तों मुंगेर पुल पूर्ण रूप से चालू हो चूका है | चालू होने से खाली आवागमन ही नहीं चालू हुआ है | बल्कि यह पुल नये रोजगार का सेतु भी बनता जा रहा है | एनएच 333 बी मुंगेर के तेलिया तालाब से लेकर एनएच 31 असम रोड हीरा टोला तक सड़क किनारे नये रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं. दूसरी ओर मुंगेर बाजार की रौनक भी बढ़ी है. क्योंकि मुंगेर गंगा पार के लगभग 2 दर्जन से अधिक गांव के लोग अब बाजार करने व घूमने-फिरने मुंगेर पहुंच रहे हैं |

मुंगेर गंगा पुल क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा. यह सपना अब धीरे-धीरे साकार रूप लेता जा रहा है. आवागमन ने जहां रफ्तार पकड़ ली है. वहीं इस पुल के माध्यम से दियारा क्षेत्र में किसानों की उपज व पशुपालकों के लिए दूध का एक बेहतर बाजार मुंगेर उपलब्ध हो रहा है |

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यूं तो पहले से ही मुंगेर बाजार में दियारा क्षेत्र से दूध की आपूर्ति की जाती रही है. लेकिन उसके लिए पशुपालकों को काफी परेशानी होती थी. वे नाव व फिर ट्रेन के सहारे दूध लेकर मुंगेर पहुंचते थे. लेकिन उन्हें अब सीधे सड़क मार्ग से मुंगेर आने में काफी सुविधा हुई है. दूसरी ओर मुंगेर, बेगूसराय व खगड़िया का दियारा क्षेत्र सब्जी व अन्य फसल उत्पादन के लिए काफी प्रसिद्ध रहा है. उन्हें मुंगेर में एक बेहतर बाजार मिला है |

मुंगेर गंगा सड़क पुल चालू होने के बाद 100 से अधिक टोटो और ऑटो चालकों को नया मार्ग के साथ रोजगार का अवसर प्रदान किया है. पुल चालू होने के बाद तेलिया तलाब के समीप खगड़िया एवं बेगूसराय के लिए जहां यात्री वाहन खुलने रहे हैं. वहीं दूसरी ओर चंडिका स्थान टीकारामपुर के समीप भी टोटो और ऑटो का अस्थायी स्टैंड बन गया है |

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जबकि कुछ वाहन है तो तेलिया तालाब के समीप से यात्री लेकर पुल पार करा कर राष्ट्रीय उच्च पथ 31 पर उतारने का काम कर रहा है. जबकि पुल घूमने के लिए भी लोग ऑटो और टोटो रिजर्व कर ले जाते हैं. यानी पुल चालू होने के कारण मुंगेर के ऑटो और टोटो चालकों को नया मार्ग, नयी सवारी मिलने से आर्थिक मजबूती प्रदान कर रहा है.

कई बेरोजगारों ने इस नये मार्ग को नये वाहनों के साथ अपनी नयी पारी की शुरुआत की है. क्योंकि कल तक अधिकांश लोग नाव से सफर करते थे. पुल पर ट्रेन चालू होने के बाद नाव की सवारी छिन गयी. जबकि सड़क पुल चालू होने के बाद नाव सेवा ही समाप्त हो गयी है.

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