कभी साबुन का व्यापार किया तो कभी बने चपरासी, संघर्ष भरी रही “रामायण” के रमानन्द सागर जी की ज़िंदगी

टीवी सीरियल दुनिया की बात करें तो 90 के दशक में दूरदर्शन पर हुए रामायण सीरीयल को लोग आज तक भूला नहीं पाएं हैं. रामायण सीरीयल वाल्मिकी रामायण पर आधारित बनाई गयी थी जिसे इतना ज्यादा प्यार मिला था की जब रामायण लगती थी तब रास्ते सुनसान पड़ जाते थे.

रामायण सीरीयल ने लोगों के दिलों में एक अलग जगह बनाई है. रामायण में काम करने वाला हर एक पात्र लोगों को काफी ज्यादा पसंद हैं.

वैसे आज हम आपको रामायण सीरीयल बनाने वाले रामानंद सागर के बारें में बताएंगे जिन्होंने रामायण सीरीयल बनाकर इतिहास बनाया था.

रामानंद सागर का जन्म साल 1917 में लाहौर में हुआ था और तब लाहौर भारत में ही था. रामानंद सागर जी का असली नाम चंद्रमौली चोपड़ा हैं. रामानंद सागर को उनकी नानी ने गोद लिया था और उन्होंने उनका चंद्रमौली नाम बदलकर रामानंद रखा था.

जब भारत का विभाजन हुआ तब उनके परिवार का बिजनेस पुरी तरह ठप्प हुआ और रामानंद के पास पढ़ाई करने के लिए भी पैसे नहीं थे. रामानंद ने चपरासी की नौकरी की. फिर साबुन बेचने तक का काम उन्होंने किया और ट्रक क्लिनर का भी काम किया और अपना खर्चा चलाया.

रामानंद सागर फिर मुंबई आए और उन्होंने एक मुक फिल्म में काम किया. फिर धीरे धीरे रामानंद सागर फिल्मों में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर, राइटर ऐसा काम करते गये और खुद आगें बढ़े.

उनको वैसे ज्यादा पहचान नहीं मिली थी, लेकिन उन्होंने फिर रामायण बनाने का फैसला किया और रामायण सीरीयल ने ऐसा कमाल किया की रामानंद सागर को घर घर में पहचाना जाने लगा और उनकी किस्मत ही बदल गयी.