अपनी मां की अधूरी मन्नत पूरी करने के लिए 17 साल बाद गांव पहुंचे थे सुशांत सिंह राजपूत

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को आज बहुत कम ही ऐसे लोग होंगे जो नहीं जानते होंगे अभिनेता ने अपनी काबिलियत के दम पर बॉलीवुड इंडस्ट्री में बहुत कम समय में ही बड़ी उपाधि हासिल कर ली थी। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में रहते हुए बहुत सी ऐसी फिल्मों में काम किया जो हमेशा उनकी याद सभी को दिलाती रहेगी।

बता दें कि उन्होंने इंडस्ट्री में फिल्म ‘काई पो छे’ से अपने कदम रखे थे। इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक कई फिल्मों में काम किया धोनी द अनटोल्ड स्टोरी में उन्होंने अपनी अदाकारी से सबका दिल जीत लिया और यहीं से उन्होंने रातों-रात एक बड़ी पहचान बना ली थी। इसके बाद उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया लेकिन उनकी छिछोरे अंतिम फिल्म रहे गई.

हाल ही में उनकी प्रथम पुण्यतिथि के मौके पर उनके फैंस और घरवालों के अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें बॉलीवुड इंडस्ट्री के कई बड़े दिक्कत कलाकारों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की थी बता दें कि 14 जून साल 2020 सुशांत सिंह राजपूत ने अचानक इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। तब से लेकर आज तक सभी लोग उनको सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार याद करते रहते हैं लेकिन आज हम उनसे जुड़ी है कि ऐसी बात आपको बताने जा रहे हैं जिससे शायद आप आज तक अनजान रहे होंगे।

लेकिन आज हम इस बारे में आपको बताने जा रहे हैं उसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे। वैसे तो आप जानते ही हैं अभिनेता चार बहनों के बीच में एक अकेले भाई थे। लेकिन क्या आप यह जानते हैं बड़ी मन्नतों के बाद सुशांत का जन्म हुआ था।

जी हां उनकी मां उषा ने कई मंदिरों में मत्था टेका इसके बाद जाकर सुशांत सिंह का जन्म उनके घर में हुआ। उनकी मां अक्सर उनके लिए मन्नतें मांगा करती थी साल 2019 में ऐसे ही एक मन्नत को पूरा करने के लिए सुशांत से 17 साल बाद अपने गांव पहुंचे थे।

सुशांत सिंह शुरू से ही काफी होनहार थे उन्होंने पढ़ाई में भी अपना नाम रोशन किया था। इसके साथ ही जैसे ही उन्होंने एक्टिंग में अपने कदम रखे तो वहां भी उन्होंने सफलता हासिल की, खबरें तो यह भी है कि अभिनेता ने जितने भी ऑडिशन अपनी लाइफ में दिए अब में पास हुए थे। ऐसे ही उनकी मां ने एक मन्नत मांगी थी कि सुशांत सिंह राजपूत के साथ सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो वे अपने बेटे का माता के मंदिर में मुंडन करवाएंगे इसको लेकर अभिनेता अपने गांव पहुंचे थे।