मजदूर महिला का राजनीति में आना नहीं आया अपनों को रास, 5 साल तक लाल बत्ती से चली फिर मजदूरी करने लगी

समय बड़ा बलवान होता वो कहते हैं “जो समय को समझ गया वह सब कुछ समझ जाता है”। आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी है जो अपने जिले की मालिक के तौर पर रहती थी. आदिवासी जिले में रहने वाली इस महिला का नाम जूली है. अर्श से फर्श पर आने वाली इस महिला के बारे में कहा जाता है कि वो कभी लाल बत्ती कार से चलती थीं. लेकिन समय का पहिया ऐसा घूमा कि आज उन्हें अपना पेट पालने के लिए बकरी चराना पड़ रहा है। आइए जानते हैं उस महिला की जिंदगी के बारें में.

पूर्व विधायक की मदद से और अपनी अनोखी छवि की मदद से उन्हें जनता ने जिला पंचायत सदस्य चुन लिया। जिला पंचायत सदस्य के बाद क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ चुकी थी। लोग उनसे काफी प्रभावित हुए। लोग उनकी तारीफ करते और चर्चा करते थे.

एक मजदूर का इस तरह से जिला पंचायत अध्यक्ष बनना लोगों को बहुत पसंद आ रहा था. जनता के समर्थन से वो जिला पंचायत अध्यक्ष लड़ने को प्रेरित हुई। पूर्व विधायक ने भी उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष लड़ने सलाह दी। उनकी मेहनत सफल रही और वह जिला पंचायत अध्यक्ष बन गयी।

सब कुछ सही चल रहा था। वह राजनीति में खुद को स्थापित करने लगी। इसी दौरान उनके साथ रहने वाले लोगों ने उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया। जूली बताती हैं कि वो लोगों के बारें में ज्यादा ध्यान देती थीं. खासकर मजदूर या गरीब वर्ग से आने वाले लोगों को वरीयता देती थीं. राजनीति में उनके साथ जुड़े लोगों को ये बात रास नहीं आ रही थी. जिसके बाद राजनीतिक लोगों ने उनका साथ देना बंद कर दिया.