BPSC 64th Result : चंदवा का बेटा बनेगा बिहार में BDO, बीपीएससी में मिली 50वीं रैंक

BPSC 64th Result 2021: कहते हैं कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो आदमी किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है। लाख विषम परिस्थिति भी उसके सपनों को परास्त नहीं कर सकता। कुछ ऐसा ही सपने को सच कर दिखाया है चंदवा के आलौदिया ग्राम निवासी रतन प्रसाद साहू के द्वितीय सुपुत्र ने। द्वितीय सुपुत्र आयुष कुमार ने अपने पहले प्रयास में ही बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर ली है।

आयुष को 1465  उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के बीच में 50 वां रैंक हासिल हुआ है। अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता रतन प्रसाद,गुरुजनों और दोस्तो को दिया है। आयुष कुमार कहते हैं कि हमने अपने जीवन में बहुत सी चीजों को बहुत करीब से देखा है,योगदान देने के बाद गरीबो के लिए चलायी जाने वाली योजनाओं का क्रियान्वयन इमानदारी के साथ करूँगा।

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बच्चों को पढ़ाने के लिए पिता ने बेच दी थी जमीन
बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे आयुष को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए आयुष के पिता रतन प्रसाद ने अपनी पुश्तैनी जमीन तक को बेच डाली। आयुष की प्रारंभिक शिक्षा ख्रीस्त राजा विद्यालय से की, मैट्रिक डीएवी खलारी से उत्तीर्ण होने के बादब इंटर की पढ़ाई की ऑक्सफ़ोर्ड राँची की। स्नातक की पढ़ाई संत जेवियर कॉलेज रांची से की। इसके बाद जनरल कंपटीशन की तैयारी के लिए दिल्ली का रुख किया। बीपीएससी की पिटी की परीक्षा 2019 में पास किया 2020 में मेंस एग्जाम पास होने के बाद 2021 में इनका चयन हो गया।

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आयुष के बड़े भाई जमशेदपुर में है दरोगा
आयुष के बड़े भाई विकास ने भी 2018 में आयोजिय दरोगा के एग्जाम को पहले प्रयास में ही पास कर ली थी। वर्तमान समय में जमशेदपुर जिला में अपना योगदान दे रहे हैं। आयुष की बहन ममता कुमारी भी पंचायत सचिवालय के एग्जाम निकाल चुकी थी लेकिन किसी कारणों से परीक्षा को ही रदद् कर दिया गया।

बच्चों की सफलता से गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं : रतन
अपने बच्चों की सफलता से गौरवान्वित रतन प्रसाद साहू कहते है कि मैंने बच्चों की पढ़ाई के लिए सबकुक बलिदान कर दिया,विषय परिस्थिति मेरी पत्नी और इन बच्चों की माँ सिमा देवी भी हमें 2006 में छोड़ गयी थी। लेकिन मैंने बच्चों का हौसला बनाये रखा।

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बच्चों ने भी सकारात्मक रिजल्ट देकर मुझे  गौरवान्वित किया है। मेरे बच्चे क्षेत्र के बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बने यही आशा करता हूँ। मेरे पिताजी स्व० पचू साव का सपना था कि उनके पोता-पोती अधिकारी बने,आज उन्होंने उनके सपनों को पूरा किया है।