बिहार के इस महादलित बस्ती की पहली बेटी हुई मैट्रिक पास इससे पहले किसी ने नहीं दी थी परीक्षा

बिहार जहां आज भी शिक्षा का बहुत आभाव है जी हाँ दोस्तों बिहार का नाम पुरे भारत के राज्यों में सबसे निचे स्तर से देखा जाता है बिहार गरीब का क्षेत्र माना जाता है | लेकिन अब धीरे-धीरे ये सब खत्म होता जा रहा है | बता दे कि बिहार में अभी भी एक ऐसा गाँव है जहां आज तक किसी ने मैट्रिक की परीक्षा नहीं दी थी | इस बार वहां से एक लड़की ने मैट्रिक की परीक्षा दी और देसन्द डिविजन से पास कर पुरे गाँव को इस बात का एहसास दिला दी की यहाँ के लोग भी परीक्षा दे सकते है यहाँ के लोग भी आगे बढ़ सकते है |

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दोस्तों दरअसल,हम बात कर रहे है | बिहार के सीतामढ़ी स्थित परिहार प्रखंड के दुबे टोला की बता दे की यह बस्ती में यह टोला में महादलित लोग रहते है और यहाँ के लोग आज तक मैट्रिक के परीक्षा में नहीं बैठे थे पहली बार यहाँ से इंदिरा कुमारी ने मैट्रिक की परीक्षा दी और सफलता भी पाई | बता दे कि इंदिरा को यह प्रेरणा बचपन बचाओ आंदोलन’ से मिला था | अब यह टोला में पूरा ख़ुशी की माहोल है चारो तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है | सभी लोग इंदिरा के ऊपर गर्व कर रहे है |

दोस्तों अगर हम मैट्रिक रिजल्ट की बात करें तो इस बार मैट्रिक की रिजल्ट 77.88 % आया है | और बिहार बोर्ड के जारी किये गए टॉपर लिस्ट के अनुसार इस बार कुल 47 बच्चे टॉप किये है | वहीँ अगर हम टॉप 5 की बात करें तो पहले स्थान पर औरंगाबाद की रामायणी को मिला है जिसने कुल 487 अंक हाशिल की है | और दूसरा स्थान नवादा के सानिया को मिला है एवं तीसरे स्थान पर मधुवनी का लाल विवेक को आया है और चौथा स्थान पर औरंगावाद की प्रज्ञा है और पांचवे स्थान पर बिहार के राजधानी पटना की निर्जला को मिला है |

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