बिना सरकारी नौकरी वाले भी रिटायर होते ही बन जायेंगे करोड़पति, जानिये कैसे?

देश भर में सरकारी कर्मचारियों के सातवें वेतन आयोग (7th Pay Commission Latest Update) की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. इस दौरान भारत में एक और कानून की खूब चर्चा हो रही है. उसका नाम है न्यू वेज कोड 2022 (New Wage Code 2022). अप्रैल में इसके लागू हो जाने की उम्मीद है.

अप्रैल 2022 से लागू हो सकता है न्यू वेज कोड : आपको बता दे की न्यू वेज कोड में सबसे ज्यादा जिस बात की चर्चा है, वह है Cost to Company (CTC). लोग पूछ रहे हैं कि इससे कर्मचारियों का कितना फायदा होगा. न्यू वेज कोड से कर्मचारियों को फायदा होगा या नुकसान. इसे कब से लागू किया जायेगा. बताया जा रहा है कि 1 अप्रैल 2022 के बाद से New Wage Code लागू हो जायेगा.

वेतन घटेगा, पीएफ में जमा राशि बढ़ेगी : मीडिया रिपोर्ट की मानें, तो 1 अप्रैल 2022 से इसे लागू करने की श्रम मंत्रालय (Labour Ministry) तैयारी कर चुका है. नये कानून के लागू होने के बाद कर्मचारियों की टेक होम सैलरी (Take Home Salary), प्रॉविडेंट फंड (Provident Fund) और ग्रेच्यूटी (Gratuity) पूरी तरह से बदल जायेगी. लोग चिंतित हैं कि महंगाई के दौर में सैलरी घटेगी, तो उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी. लेकिन कहा यह जा रहा है कि आज पैसे कम मिलेंगे, लेकिन रिटायरमेंट के बाद मोटी रकम मिलेगी.

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नये वेज कोड के फायदे : खास बात यह है की अगर आपका वेतन 50 हजार रुपये प्रति माह है और आपका मूल वेतन 15 हजार रुपये है, तो जब आप रिटायर होंगे, तो पीएफ में आपकी जमा पूंजी आज के ब्याज दर से 69,97,411 रुपये हो जायेगी. अगर आपकी बेसिक सैलरी 25 हजार रुपये है, तो रिटायरमेंट के समय आपके पीएफ अकाउंट में 1,16,62,366 जमा हो जायेंगे. पीएफ में जमा राशि की गणना में सालाना 5 फीसदी वृद्धि मानी गयी है.

क्‍या है कॉस्‍ट टू कम्‍पनी (Cost to Company) : बताया जा रहा है की कंपनी अपनी तरफ से अपने कर्मचारियों पर जो पैसा खर्च करती है, उसे कॉस्ट टू कंपनी (CTC) कहा जाता है. एक शब्द में कहें, तो कर्मचारी के सैलरी पैकेज को CTC कहते हैं. इसमें मंथली बेसिक पे, भत्ता, री-इम्‍बर्समेंट शामिल होता है. ग्रेच्‍यूटी, एनुअल वैरिएबल पे, एनुअल बोनस जैसे प्रोडक्ट भी CTC में शामिल होते हैं. सीटीसी की रकम कर्मचारी की टेक होम सैलरी के बराबर कभी नहीं होती. CTC में कई कंपोनेंट होते हैं इसलिए यह अलग होती है. CTC = ग्रॉस सैलरी + PF + ग्रेच्‍यूटी.

  • बेसिक सैलरी: बेसिक सैलरी को हिंदी में मूल वेतन कहते हैं. सभी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी अलग-अलग होती है. यह कर्मचारी के पद और जिस उद्योग में वह काम करता है, उसके अनुसार उसकी बेसिक सैलरी होती है.
  • ग्रॉस सैलरी : टैक्‍स काटे बिना जो बेसिक पे और भत्तों को जोड़कर सैलरी बनती है, उसे ग्रॉस सैलरी कहते हैं. इसमें बोनस, ओवर टाइम, हॉलिडे पे और अन्‍य मद के भत्ते शामिल होते हैं. Gross Salary = बेसिक सैलरी+HRA+अन्‍य भत्ते.
  • नेट सैलरी: किसी कर्मचारी को हाथ में जितने पैसे मिलते हैं या उसके अकाउंट में हर महीने जो सैलरी दी जाती है, उसे नेट सैलरी या टेक होम सैलरी कहते हैं. टैक्‍स कटने के बाद जो सैलरी बनती है, उसे नेट इनकम कहते हैं. Net Salary = Basic Salary + HRA + भत्ते – आयकर – EPF – Professional Tax.
  • भत्ते (Allowances): नौकरी के एवज में कंपनी अपने कर्मचारियों को कई तरह के भत्ते देती है. अलग-अलग कंपनियों में ये भत्ते अलग-अलग हो सकते हैं. जो भत्ते मिलते हैं, वे इस प्रकार हैं-
  • HRA : घर के एवज में कर्मचारियों को हाउस रेंट अलाउंस दिया जाता है.
  • LTA : कर्मचारी को साल में एक बार देश में कहीं भी यात्रा करने के लिए कंपनी एक भत्ता देती है, जिसे LTA कहते हैं. यात्रा खर्च में फूडिंग, होटल का किराया आदि शामिल नहीं होता.
  • वाहन भत्ता: कर्मचारी को दफ्तर से घर जाने में आने वाले खर्च के एवज में कनवेंस अलाउंस दिया जाता है.
  • महंगाई भत्ता : महंगाई के एवज में महंगाई भत्ता (DA) जीविका से जुड़ा भत्ता है. सरकारी कर्मचारी और पेंशनर इसके पात्र होते हैं.
  • अन्य भत्ते: स्‍पेशल अलाउंस, मेडिकल अलाउंस व प्रोत्‍साहन या इंसेटिव को अन्य भत्तों में शामिल किया जाता है. इतना ही नहीं, कई कंपनियों में कर्मचारी को इलाज कराने, न्‍यूजपेपर बिल और फोन खर्च को रीइम्‍बर्स करने का प्रावधान होता है. यह रकम वेतन में शामिल नहीं किया जाता. बिल देने पर ही इसका भुगतान किया जाता है.
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