बड़ी खबर : बिहार के राजधानी पटना एयरपोर्ट भी बिकेगा, जाएगा निजी हाथों में, ट्रेन और सड़क भी जायेंगे प्राइवेट सेक्टर के हाथो में

निजीकरण के लिए कदम बढ़ा रही केंद्र सरकार ने बिहार के सम्बन्ध में एक बड़ा फैसला लिया है। बिहार की कई सड़कों को अब निजी हाथों को सौंप दी जाएगी। इस बिच बड़ी खबर यह भी है कि पटना एयरपोर्ट का का भी निजीकरण किया जाएगा। इसके अलावा पटना से सभी जिलों के लिए प्राइवेट पैसेंजर ट्रेनें भी चलाई जाएंगी। बता दें, केंद्र सरकार ने कुल 13 तरह की सरकारी संपत्तियों को बेचने या फिर उसे लीज पर देने का फैसला किया है।

जानकारी के लिए बता दे की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन की लॉन्चिंग के साथ इसकी घोषणा की है। सरकार ने तय किया है कि सरकारी संपत्तियों में हिस्सेदारी बेचकर या संपत्ति को लीज पर देकर कुल छह लाख करोड़ जुटाए जाएं। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने इसका पूरा खाका पेश किया है। इस योजना को 2025 तक चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। पटना एयरपोर्ट को साल 2023 में निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है।

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जानकारी के अनुसार बिहार की राजधानी पटना जंक्शन से प्राइवेट ट्रेनें भी चलाई जाएंगी। बिहार के 7 सड़कों का संचालन भी निजी हाथों में देने की तैयारी है। बिहार की जिन 7 सड़कों को निजी हाथों में दिया जाएगा उनमें हाजीपुर-मुजफ्फरपुर, पूर्णिया-दालकोला, कोटवा-मेहसी-मुजफ्फरपुर, खगड़िया-पूर्णिया, मुजफ्फरपुर-सोनबरसा, बाराचट्टी-गोरहर और मोकामा-मुंगेर की सड़क के शामिल है। केंद्र सरकार पटना एयरपोर्ट (Patna airport) को जब लीज पर देगी तो उसे 1000 करोड़ की राशि मिलेगी। केंद्र सरकार ने देश के कुल 25 एयरपोर्ट को निजी हाथों में देने का फैसला किया है। इनमें से 6 एयरपोर्ट इसी साल निजी हाथ में चले जाएंगे जबकि 6 एयरपोर्ट अगले वित्तीय वर्ष में।

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देश के कुल 25 एयरपोर्ट की होगी निजीकरण :

पटना एयरपोर्ट को निजी हाथों में देने पर केंद्र सरकार को 1000 करोड़ की राशि मिलेगी। साथ ही, आप यह भी जान लीजिए कि सिर्फ पटना एयरपोर्ट ही नहीं केंद्र सरकार ने देश के कुल 25 एयरपोर्ट को निजी हाथों में देने का फैसला किया है। इनमें से 6 एयरपोर्ट इसी साल (2021) निजी हाथ में चले जाएंगे जबकि 6 एयरपोर्ट अगले वित्तीय वर्ष निजी कंपनियों को सौंप दिए जाएंगे। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि उसे हाईवे को निजी हाथों में सौंपने से सबसे ज्यादा पैसा मिलेगा। 27600 किलोमीटर सड़कें निजी ट्रैक्टर को दी जा रही हैं। इनमें उत्तर भारत की 29 सड़कें, दक्षिण भारत की 28, पूर्व की 22 और पश्चिम भारत की 25 सड़कें लीज पर देने का फैसला किया गया है।

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