तौकते गया नहीं कि ‘यास’ का अलर्ट हुआ जारी, बिहार पर भी डालेगा कुछ ऐसा असर

पश्चिम में अरब सागर के टाक्‍टे चक्रवात के बाद अब पूर्वी तट पर एक दूसरे चक्रवात का बड़ा खतरा पूर्वी क्षेत्र के राज्यों पर मंडरा रहा है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार चक्रवात यास 26-27 मई को बंगाल की खाड़ी से टकराएगा। पटना स्थित मौसम विज्ञान के अधिकारियों का कहना है कि स्वाभाविक रूप से इसका असर बिहार के दक्षिण-पूर्वी हिस्से पर पड़ेगा।

ओडिशा के करीब होने का असर दिखेगा। वैसे अभी इसकी भयावहता का आकलन किया जा रहा है। एक-दो दिनों में यह साफ हो सकेगा कि इसका किस पैमाने पर बिहार में असर दिखेगा। इधर, टॉक्‍टे के साइड इफेक्‍ट के तौर पर यूपी और बिहार में उठे चक्रवात से बारिश का सिलसिला अभी जारी है। पटना के मौसम विज्ञान केंद्र ने दरभंगा, वैशाली, पटना, समस्‍तीपुर, अरवल और जहानाबाद में बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार उत्तर अंडमान सागर और बंगाल की पूर्वी मध्य खाड़ी में दो दिन बाद यानी 22 मई को कम दबाव का क्षेत्र बनना शुरू होगा। ऐसा आकलन है कि इसके 72 घंटे बाद कम दबाव के क्षेत्र में यह चक्रवात बन जाएगा।

मौसम विज्ञान केंद्र के अधिकारी के अनुसार यास का असर यह होगा कि बिहार के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में तेज हवा चलेगी। बारिश भी होगी। हवा की तीव्रता कम से कम प्रति घंटे सत्तर किमी की होगी। वैसे पुख्ता तौर पर इसकी भयावहता की पूरी जानकारी उपलब्ध करने में अभी दो दिन और लगेंगे। उसके बाद बिहार के लिए चेतावनी जारी की जाएगी।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार एवं मध्य प्रदेश में बने चक्रवात के कारण गुरुवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में घंटों तेज बारिश हुई। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अरब सागर में आये तूफान के बाहरी भाग में बने दबाव के कारण उत्तर प्रदेश, बिहार एवं मध्य प्रदेश में चक्रवात का प्रभाव है। इस तरह की स्थिति अगले दो दिन तक बनी रहने की उम्मीद है। उसके बाद मौसम साफ हो जाएगा।

राज्य में मई में सामान्य से 101 फीसद अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। सामान्यत: प्रदेश में 1 से 19 मई तक प्री मानसून के दौरान 29 मिलीमीटर बारिश होती है। लेकिन इस वर्ष इस दौरान 59 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। वहीं अप्रैल में सामान्य से कम बारिश हुई थी।